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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 11 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 11 • मन्त्र 7

15.11.7

Mantra ID: 15.11.7

ऐनं॑ प्रि॒यंग॑च्छति प्रि॒यः प्रि॒यस्य॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.11.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह कहने वाला कि जैसा तुम्हारा वक्ष है वैसा ही हो, अपने हेतु वक्ष को खोल लेता है. (७)

EN English Translation

The one who says that your chest is as it is, opens the chest for himself. (7)

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