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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 17 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 17 • मन्त्र 1

15.17.1

Mantra ID: 15.17.1

तस्य॒व्रात्य॑स्य । योऽस्य॑ प्रथ॒मो व्या॒नः सेयं भूमिः॑ ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.17.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस व्रात्य का प्रथम व्यान भूमि है. (१)

EN English Translation

The first vyan of this vratya is the land. (1)

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