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15.2.12
य॑ज्ञाय॒ज्ञिय॑स्य च॒ वै स वा॑मदे॒व्यस्य॑ च य॒ज्ञस्य॑ च॒ यज॑मानस्य च पशू॒नांच॑ प्रि॒यं धाम॑ भवति॒ तस्य॒ दक्षि॑णायां दिशि ॥ (१२)
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अथर्ववेद मन्त्र 15.2.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जो उस का सत्कार करता है, वह यज्ञाज्ञिय, वामदेव्य, यज्ञ, यजमान और पशुओं का प्रिय होता है. उस का स्थान दक्षिण दिशा में होता है. (१२)
EN English Translation
He who honors him is dear to yajnagya, vamdevya, yajna, host and animals. His location is in south direction. (12)