Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
15.2.14
अ॑मावा॒स्या चपौर्णमा॒सी च॑ परिष्क॒न्दौ मनो॑ विप॒थम् । मा॑त॒रिश्वा॑ च॒ पव॑मानश्च विपथवा॒हौवा॒तः सार॑थी रे॒ष्मा प्र॑तो॒दः । की॒र्तिश्च॒ यश॑श्च पुरःस॒रावैनं॑की॒र्तिर्ग॑च्छ॒त्या यशो॑ गच्छति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (१४)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 15.2.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अमावस्या और पूर्णमासी उस की रक्षा करने वाली होती हैं. मन उस का युद्ध संबंधी रथ होता है. श्वास एवं उच्छवाए उस के रथ के घोड़े हैं. प्राण उस का सारथी है. कीर्ति उस के निकट आती है तथा उस के पास यश मिलते हैं उसे कीर्ति एवं यश मिलते हैं. (१४)
EN English Translation
Amavasya and Purnamasi are the protectors of him. The mind is his chariot of war. Breathing and exhaling are the horses of his chariot. Prana is his charioteer. Kirti comes close to him and gets fame and fame. (14)