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15.2.23
श्यै॒ताय॑ च॒ वैस नौ॑ध॒साय॑ च सप्त॒र्षिभ्य॑श्च॒ सोमा॑य च॒ राज्ञ॒ आ वृ॑श्चते॒ य ए॒वंवि॒द्वांसं॒ व्रात्य॑मुप॒वद॑ति ॥ (२३)
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अथर्ववेद मन्त्र 15.2.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जो इस प्रकार जानने वाले व्रात्य का अपमान करता है, वह श्वेत, नौधस, सप्तर्षि और राजा सोम का अपराधी बनता है. (२३)
EN English Translation
The one who insults the vratya who knows in this way becomes the culprit of White, Naudhas, Saptarshi and King Soma. (23)