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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 2 • Mantra 28

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 2 • मन्त्र 28

15.2.28

Mantra ID: 15.2.28

की॒र्तिश्च॒ यश॑श्चपुरःस॒रावैनं॑की॒र्तिर्ग॑च्छ॒त्या यशो॑ गच्छति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (२८)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.2.28 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो इस बात को जानता है कीर्ति और यश उस के आगे चलने वाले होते हैं. कीर्ति उस के पास आती है और यश उस के समीप आता है. (२८)

EN English Translation

Kirti and Yash are going to walk ahead of him who knows this. Kirti comes to him and Yash comes near him. (28)

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