Popular:
अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 5 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 5 • मन्त्र 4

15.5.4

Mantra ID: 15.5.4

तस्मै॒दक्षि॑णाया दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शाच्छ॒र्वमि॑ष्वा॒सम॑नुष्ठा॒तार॑मकुर्वन् ॥ (४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 15.5.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवताओं ने दक्षिण दिशा की ओर से बाण चलाने वाले शर्व अर्थात्‌ शिव को उस का अनुष्ठान करने वाला बनाया. (४)

EN English Translation

The gods made Sharva, i.e. Shiva, who agnid arrows from the south direction, the one who performed the ritual of it. (4)

卐 HinduText AI