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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 5 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 5 • मन्त्र 9

15.5.9

Mantra ID: 15.5.9

उ॒ग्र ए॑नं दे॒व इ॑ष्वा॒सउदी॑च्या दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शाद॑नुष्ठा॒तानु॑ तिष्ठति॒नैनं॑ श॒र्वो न भ॒वो नेशा॑नः । नास्य॑ प॒शून्न स॑मा॒नान्हि॑नस्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.5.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवों ने उत्तर दिशा के कोने से धनुष धारण करने वाले उग्रदेव को इस का अनुष्ठान करने वाला बनाया. (९)

EN English Translation

The devas made Ugradev, who wore a bow from the north corner, the ritualist of this. (9)

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