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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 4 • Mantra 54

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 4 • मन्त्र 54

18.4.54

Mantra ID: 18.4.54

ऊ॒र्जो भा॒गो यइ॒मं ज॒जानाश्मान्ना॑ना॒माधि॑पत्यं ज॒गाम॑ । तम॑र्चत वि॒श्वमि॑त्रा ह॒विर्भिः॒ सनो॑ य॒मः प्र॑त॒रं जी॒वसे॑ धात् ॥ (५४)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.4.54 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

चरु रूप अन्न के अधिकारी जिन यमराज ने इसे प्रेत बनाया है, जो यम इन चरुओं को ढकने वाले पत्थरों के स्वामी हैं, हे बंधुओ! उन यम देव को हवियों के द्वारा संतुष्ट करो. वे दीर्घ जीवन के हेतु हमारा पोषण करे. (५४)

EN English Translation

Yamraj, the officer of charu roop anna, who has made it a ghost, who is the swami of the stones covering these charus, O brothers! Satisfy those Yama Dev through the hives. May they nurture us for a long life. (54)

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