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18.4.64
यद्वो॑अ॒ग्निरज॑हा॒देक॒मङ्गं॑ पितृलो॒कं ग॒मयं॑ जा॒तवे॑दाः । तद्व॑ ए॒तत्पुन॒राप्या॑ययामि सा॒ङ्गाः स्व॒र्गे पि॒तरो॑ मादयध्वम् ॥ (६४)
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अथर्ववेद मन्त्र 18.4.64 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे प्रेत! तुम्हारे जिस अंग को अग्नि ने दूर फेंक कर भस्म नहीं किया है. उसे मैं पुनः अग्नि में डाल कर तुम्हारी वृद्धि करता हूं. तूम पूर्ण अंग वाले हो कर स्वर्ग की ओर गमन करते हुए प्रसन्नता प्राप्त करो. (६४)
EN English Translation
O ghost! The part of you that agni has not consumed by throwing away. I put it in the agni again and increase you. Be happy by going to heaven with your full limbs. (64)