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अथर्ववेद

Kanda 19 • Sukta 29 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 19 • सूक्त 29 • मन्त्र 7

19.29.7

Mantra ID: 19.29.7

ओष॑ दर्भ स॒पत्ना॑न्मे॒ ओष॑ मे पृतनाय॒तः । ओष॑ मे॒ सर्वा॑न्दु॒र्हार्दो॒ ओष॑ मे द्विष॒तो म॑णे ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 19.29.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे दर्भमणि! मेरे शत्रुओं को तथा मेरे विरुद्ध सेना एकत्र करने वालों को जला दो. मेरे प्रति दुर्भावना रखने वाले सभी व्यक्तियों को तथा मुझ से द्वेष करने वालों को जला दो. (७)

EN English Translation

O darbhamani! Burn my enemies and those who gathered the army against me. Burn all those who have ill-will towards me and those who hate me. (7)

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