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19.33.1
स॑हस्रा॒र्घः श॒तका॑ण्डः॒ पय॑स्वान॒पाम॒ग्निर्वी॒रुधां॑ राज॒सूय॑म् । स नो॒ऽयं द॒र्भः परि॑ पातु वि॒श्वतो॑ दे॒वो म॒णिरायु॑षा॒ सं सृ॑जाति नः ॥ (१)
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अथर्ववेद मन्त्र 19.33.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
बहुमूल्य, सौ गांठों वाली, शक्ति संपन्न, जलों की अग्नि अर्थात् वाडवाग्नि, राजसूय कर्म के समान यह दर्भ चारों ओर से हमारी रक्षा करे. यह देवों के द्वारा निर्मित मणि हमें आयु से मिलाए. (१)
EN English Translation
May this place protect us from all sides like precious, hundred knots, powerful, agni of waters i.e. Wadvagni, Rajasuya Karma. May this gem made by the devas match us with age. (1)