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अथर्ववेद

Kanda 2 • Sukta 20 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 2 • सूक्त 20 • मन्त्र 5

2.20.5

Mantra ID: 2.20.5

वायो॒ यत्ते॒ तेज॒स्तेन॒ तम॑ते॒जसं॑ कृणु॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 2.20.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वायु देव! तुम्हारा जो तेज है, उस के द्वारा उन्हें तेजहीन बनाओ, जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (५)

EN English Translation

O Vayu Dev! Make those who hate us or those we hate without a sharp one by yours. (5)

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