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अथर्ववेद

Kanda 2 • Sukta 5 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 2 • सूक्त 5 • मन्त्र 6

2.5.6

Mantra ID: 2.5.6

अह॒न्नहिं॒ पर्व॑ते शिश्रिया॒णं त्वष्टा॑स्मै॒ वज्रं॑ स्व॒र्यं॑ ततक्ष । वा॒श्रा इ॑व धे॒नवः॒ स्यन्द॑माना॒ अञ्जः॑ समु॒द्रमव॑ जग्मु॒रापः॑ ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 2.5.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पर्वत पर सोते हुए इस वृत्रासुर का इंद्र ने वध किया. वत्र के पिता त्वष्टा ने इंद्र के लिए सुगमता से चलाया जाने वाला तथा तेज धारों वाला वज्र बनाया. इस के बाद जल सागर की ओर इस प्रकार बहने लगा, जिस प्रकार रंभाती हुई गाएं दौड़ती हैं. (६)

EN English Translation

Indra killed this Vritrasura while sleeping on the mountain. Vatra's father Tvashta made an easy-to-operate and sharp-edged vajra for Indra. After this, the water started flowing towards the ocean in such a way that the rambed cows run. (6)

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