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अथर्ववेद

Kanda 2 • Sukta 9 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 2 • सूक्त 9 • मन्त्र 4

2.9.4

Mantra ID: 2.9.4

दे॒वास्ते॑ ची॒तिम॑विदन्ब्र॒ह्माण॑ उ॒त वी॒रुधः॑ । ची॒तिं ते॒ विश्वे॑ दे॒वा अवि॑द॒न्भूम्या॒मधि॑ ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 2.9.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मणि! ग्रह विकार से रोगी को छुड़ाने से तेरे प्रभाव को इंद्र आदि देव जानते हैं. ब्राह्मण एवं वृक्ष भी तेरे इस प्रभाव को जानते हैं. हे रोगी! तुझ मूर्च्छित को चेतना प्राप्त होने की बात धरती पर सभी देव जानते हैं. (४)

EN English Translation

O gem! Indra adi dev knows your effect by removing the patient from planetary disorder. Brahmins and trees also know this influence of yours. O patient! All the gods on earth know that your unconscious attains consciousness. (4)

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