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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 124 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 124 • मन्त्र 3

20.124.3

Mantra ID: 20.124.3

अ॒भी षु णः॒ सखी॑नामवि॒ता ज॑रितॄ॒णाम् । श॒तं भ॑वास्यू॒तिभिः॑ ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.124.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम हम स्तुतिकर्ताओं के सखा के समान हो. तुम हमारे सामने सैकड़ों बार प्रकट हुए हो. (३)

EN English Translation

O Indra! You are like a friend of us eulogists. You have appeared to us hundreds of times. (3)

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