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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 21 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 21 • मन्त्र 10

20.21.10

Mantra ID: 20.21.10

त्वमा॑विथ सु॒श्रव॑सं॒ तवो॒तिभि॒स्तव॒ त्राम॑भिरिन्द्र॒ तूर्व॑याणम् । त्वम॑स्मै॒ कुत्स॑मतिथि॒ग्वमा॒युं म॒हे राज्ञे॒ यूने॑ अरन्धनायः ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.21.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम ने सहायक विहीन राजा सुश्रवा की अपने रक्षा साधनों से रक्षा की. तुम ने तूर्वयाण नाम के राजा का पालन किया. तुम ने युवराज बने हुए कुत्स, अतिथिग्व और आयु का आश्रय सुश्रवा को प्राप्त कराया. (१०)

EN English Translation

O Indra! You protected the unaided king Sushrava with your protective means. You gave Sushrava the shelter of kuts, guests and age, who remained the crown prince. (10)

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