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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 43 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 43 • मन्त्र 3

20.43.3

Mantra ID: 20.43.3

यस्य॑ ते वि॒श्वमा॑नुषो॒ भूरे॑र्द॒त्तस्य॒ वेद॑ति । वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.43.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

तुम्हारे द्वारा दिए गए जिस धन को तुम्हारे सभी उपासक प्राप्त करते हैं. तुम हमें वही धन प्रदान करो. (३)

EN English Translation

The wealth given by you is received by all your worshippers. You give us the same money. (3)

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