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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 49 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 49 • मन्त्र 3

20.49.3

Mantra ID: 20.49.3

श॒क्रो वाच॒मधृ॑ष्णुहि॒ धाम॑धर्म॒न्वि रा॑जति । विम॑दन्ब॒र्हिरास॑रन् ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.49.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम कठोर वचन मत बोलो. तुम हमारे यज्ञ में आ कर बिछी हुई कुशाओं पर विराजमान होओ तथा प्रसन्न बनो. (३)

EN English Translation

O Indra! Don't speak harsh words. You come to our yajna and sit on the lying kushas and be happy. (3)

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