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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 49 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 49 • मन्त्र 7

20.49.7

Mantra ID: 20.49.7

येना॑ समु॒द्रमसृ॑जो म॒हीर॒पस्तदि॑न्द्र॒ वृष्णि॑ ते॒ शवः॑ । स॒द्यः सो अ॑स्य महि॒मा न सं॒नशे॒ यं क्षो॒णीर॑नुचक्र॒दे ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.49.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जिस बल से तुम ने सागरों को भरने वाले जल की रचना की, वह बल हम को मनचाहा फल देने वाला हो. इंद्र की महिमा को शत्रु प्राप्त नहीं कर सकते. (७)

EN English Translation

O Indra! The force with which you created the water that fills the oceans is going to give us the desired fruit. Enemies cannot attain the glory of Indra. (7)

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