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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 71 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 71 • मन्त्र 3

20.71.3

Mantra ID: 20.71.3

यः कु॒क्षिः सो॑म॒पात॑मः समु॒द्र इ॑व॒ पिन्व॑ते । उ॒र्वीरापो॒ न का॒कुदः॑ ॥ (३)

ॐ

शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.71.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

॥ वैदिक संदर्भ ॥

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोमरस पीने वाले इंद्र की कोख ककुद अर्थात्‌ ठाट वाले बैल तथा अधिक जल को धारण करने वाले सागर के समान बढ़ जाती है. (३)

EN English Translation

Indra's womb, which drinks someras, grows like a kakud i.e. a bull with a lump and an ocean that holds more water. (3)

शास्त्र जिज्ञासा
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