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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 71 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 71 • मन्त्र 5

20.71.5

Mantra ID: 20.71.5

ए॒वा हि ते॒ विभू॑तय ऊ॒तय॑ इन्द्र॒ माव॑ते । स॒द्यश्चि॒त्सन्ति॑ दा॒शुषे॑ ॥ (५)

ॐ

शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.71.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

॥ वैदिक संदर्भ ॥

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जो यजमान तुम्हें हवि देता है, उस के निमित्त तुम्हारे रक्षा साधन सदा प्रस्तुत रहते हैं. (५)

EN English Translation

O Indra! Your protective means are always presented for the host who gives you courage. (5)

शास्त्र जिज्ञासा
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