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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 85 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 85 • मन्त्र 1

20.85.1

Mantra ID: 20.85.1

मा चि॑द॒न्यद्वि शं॑सत॒ सखा॑यो॒ मा रि॑षण्यत । इन्द्र॒मित्स्तो॑ता॒ वृष॑णं॒ सचा॑ सु॒ते मुहु॑रु॒क्था च॑ शंसत ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.85.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तोताओ! तुम अन्य किसी देवता का आश्रय मत लो. तुम किसी अन्य देवता की स्तुति मत करो. हे तैयार किए गए सोमरस वाले होताओ! तुम इंद्र की स्तुति करते हुए बारबार उवथों का गान करो. (१)

EN English Translation

O stotao! Don't take shelter from any other god. Don't praise any other god. O be the ones with the prepared somers! Praise Indra and sing the obstinates again and again. (1)

卐 HinduText AI