Popular:
अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 88 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 88 • मन्त्र 4

20.88.4

Mantra ID: 20.88.4

बृह॒स्पतिः॑ प्रथ॒मं जाय॑मानो म॒हो ज्योति॑षः पर॒मे व्योमन् । स॒प्तास्य॑स्तुविजा॒तो रवे॑ण॒ वि स॒प्तर॑श्मिरधम॒त्तमां॑सि ॥ (४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.88.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति महान ज्योतिष चक्र से परम व्योम में आविर्भूत अर्थात्‌ प्रकट होते हैं. वे बृहस्पति सप्त रश्मि वाले बन कर अंधकार को मिटा देते हैं. (४)

EN English Translation

Jupiter appears in the supreme vyom from the great astrology cycle. They erase darkness by becoming Jupiter sapta rashmi. (4)

卐 HinduText AI