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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 89 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 89 • मन्त्र 4

20.89.4

Mantra ID: 20.89.4

त्वां जना॑ ममस॒त्येष्वि॑न्द्र सन्तस्था॒ना वि ह्व॑यन्ते समी॒के । अत्रा॒ युजं॑ कृणुते॒ यो ह॒विष्मा॑न्नासुन्वता स॒ख्यं व॑ष्टि॒ शूरः॑ ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.89.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! मेरे पुरुष तुम्हीं को बुलाते हैं. जो वीर तुम्हारी मित्रता की कामना करते हैं तथा हवि वाला अनुष्ठान करते हैं, वे सोमरस का संस्कार भी करते हैं. (४)

EN English Translation

O Indra! My men call you. The heroes who wish for your friendship and perform the ritual of havi also perform the rites of Someras. (4)

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