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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 89 • Mantra 8

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 89 • मन्त्र 8

20.89.8

Mantra ID: 20.89.8

प्र यम॒न्तर्वृ॑षस॒वासो॒ अग्म॑न्ती॒व्राः सोमा॑ बहु॒लान्ता॑स॒ इन्द्र॑म् । नाह॑ दा॒मानं॑ म॒घवा॒ नि यं॑स॒न्नि सु॑न्व॒ते व॑हति॒ भूरि॑ वा॒मम् ॥ (८)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.89.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिन इंद्र के समीप तीव्र स्वाद वाला सोमरस गमन करता है, वे इंद्र धन की बाधक रस्सी को रोकते हैं तथा सोम का संस्कार करने वाले स्तोता को असीमित धन प्रदान करते हैं. (८)

EN English Translation

Indra, near whom the intensely flavoured Someras travels, stops the obstacle rope of Indra wealth and gives unlimited wealth to the stota who performs the rites of Soma. (8)

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