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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 90 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 90 • मन्त्र 1

20.90.1

Mantra ID: 20.90.1

यो अ॑द्रि॒भित्प्र॑थम॒जा ऋ॒तावा॒ बृह॒स्पति॑राङ्गिर॒सो ह॒विष्मा॑न् । द्वि॒बर्ह॑ज्मा प्राघर्म॒सत्पि॒ता न॒ आ रोद॑सी वृष॒भो रो॑रवीति ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.90.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्रथम प्रकट होने वाले, मेघों को चीरने वाले, सत्यभाषी आंगिरस अर्थात्‌ अंगिरा गोत्र वाले बृहस्पति हवि प्राप्त करने के अधिकारी हैं. वे पालन कर्ता, आकाश और पृथ्वी में शब्द करने वाले, दो बर्हो अर्थात्‌ मोर के पंखों से सुशोभित, धर्म का पालन करने वाले और वर्षा करने वाले हैं. (१)

EN English Translation

The first to appear, the one who cut the clouds, the satya-speaking Angiras, i.e. Jupiter with the Angira tribe, is entitled to receive havi. They are the servitors, the ones who speak in the heavens and the earth, adorned with the wings of the peacock, the follower of dharma, and the rain. (1)

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