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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 91 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 91 • मन्त्र 2

20.91.2

Mantra ID: 20.91.2

ऋ॒तं शंस॑न्त ऋ॒जु दीध्या॑ना दि॒वस्पु॒त्रासो॒ असु॑रस्य वी॒राः । विप्रं॑ प॒दमङ्गि॑रसो॒ दधा॑ना य॒ज्ञस्य॒ धाम॑ प्रथ॒मं म॑नन्त ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.91.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सत्य कथन द्वारा प्राण के वीर्य से उत्पन्न हुए अंगिरा यज्ञशाला में प्रथम अर्थात्‌ उत्तम समझे जाते हैं. (२)

EN English Translation

Angira, born from the semen of prana by truth statement, is considered to be the first i.e. the best in the yagyashala. (2)

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