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अथर्ववेद

Kanda 3 • Sukta 25 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 3 • सूक्त 25 • मन्त्र 5

3.25.5

Mantra ID: 3.25.5

आजा॑मि॒ त्वाज॑न्या॒ परि॑ मा॒तुरथो॑ पि॒तुः । यथा॒ मम॒ क्रता॒वसो॒ मम॑ चि॒त्तमु॒पाय॑सि ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 3.25.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे नारी! मैं कोड़े से मार कर तुझे अपने अभिमुख करता हू. मैं वहां से तुझे अपने समीप बुलाता हूं, जिस से तू मेरे संकल्प को पूरा करे और मेरी बुद्धि के अनुसार चले. (५)

EN English Translation

O woman! I flog you with my face. I call you from there to Me, so that you may fulfill my resolve and walk according to my wisdom. (5)

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