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अथर्ववेद

Kanda 3 • Sukta 30 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 3 • सूक्त 30 • मन्त्र 2

3.30.2

Mantra ID: 3.30.2

अनु॑व्रतः पि॒तुः पु॒त्रो मा॒त्रा भ॑वतु॒ संम॑नाः । जा॒या पत्ये॒ मधु॑मतीं॒ वाचं॑ वदतु शन्ति॒वाम् ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 3.30.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पुत्र पिता के अनुकूल कर्म करने वाला हो. माता पुत्र आदि के प्रति सौमनस्य वाली बने. पत्नी पति से मधुर एवं सुखकर वचन कहे. (२)

EN English Translation

The son should be the one who works according to the father. Become a gentleman towards mother and son etc. The wife should say sweet and happy words to the husband. (2)

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