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अथर्ववेद

Kanda 3 • Sukta 4 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 3 • सूक्त 4 • मन्त्र 7

3.4.7

Mantra ID: 3.4.7

प॒थ्या॑ रे॒वती॑र्बहु॒धा विरू॑पाः॒ सर्वाः॑ सं॒गत्य॒ वरी॑यस्ते अक्रन् । तास्त्वा॒ सर्वाः॑ संविदा॒ना ह्व॑यन्तु दश॒मीमु॒ग्रः सु॒मना॑ वशे॒ह ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 3.4.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

धनवती एवं मार्ग में हितकारिणी देवियां आप का कल्याण करें. हे राजन्‌! अनेक रूपों वाली जल देवियां एकत्र हो कर आप के लिए श्रेयस्कर बनें एवं एकमत हो कर आप को आप के राष्ट्र में बुलाएं. वहां आप सशक्त और प्रसन्न रह कर सौ वर्ष का जीवन भोगें. (७)

EN English Translation

Wealthy and beneficial goddesses on the way should benefit you. O king! Water goddesses of many forms come together and be better for you and unanimously call you to your nation. There you should be strong and happy and live a hundred years of life. (7)

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