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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 18 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 18 • मन्त्र 5

4.18.5

Mantra ID: 4.18.5

अ॒नया॒हमोष॑ध्या॒ सर्वाः॑ कृ॒त्या अ॑दूदुषम् । यां क्षेत्रे॑ च॒क्रुर्यां गोषु॒ यां वा॑ ते॒ पुरु॑षेषु ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.18.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस सहदेवी नाम की जड़ीबूटी के द्वारा मैं ने सभी कृत्याओं को दूषित एवं प्रभावहीन बना दिया है. मेरे शत्रुओं ने जिस कृत्या को मेरे खेतों में, मेरी गोशाला में और वायु संचार वाले स्थान में गाड़ दिया है, उन सभी कृत्याओं को मैं प्रभावहीन कर चुका हूं. (५)

EN English Translation

Through this herb named Sahadevi, I have made all the acts contaminated and ineffective. I have rendered ineffective all the acts that my enemies have buried in my fields, in my cowshed and in the air circulation space. (5)

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