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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 19 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 19 • मन्त्र 3

4.19.3

Mantra ID: 4.19.3

अग्र॑मे॒ष्योष॑धीनां॒ ज्योति॑षेवाभिदी॒पय॑न् । उ॒त त्रा॒तासि॒ पाक॒स्याथो॑ ह॒न्तासि॑ र॒क्षसः॑ ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.19.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सहदेवी अथवा अपामार्ग! तू सभी जड़ीबूटियों में उसी प्रकार श्रेष्ठ है, जिस प्रकार प्रकाश करने वालों में सूर्य! तू दुर्बल की रक्षक और उसे बाधा पहुंचाने वाले राक्षस की विनाशक है. (३)

EN English Translation

O Sahadevi or Apamarg! You are superior among all herbs, just as the sun is superior among those who light up! You are the protector of the weak and the destroyer of the demon who obstructs it. (3)

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