Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
4.20.1
आ प॑श्यति॒ प्रति॑ पश्यति॒ परा॑ पश्यति॒ पश्य॑ति । दिव॑म॒न्तरि॑क्ष॒माद्भूमिं॒ सर्वं॒ तद्दे॑वि पश्यति ॥ (१)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 4.20.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सदापुष्पा नाम की जड़ीबूटी! यह पुरुष तेरी मणि को धारण करने वाला होने से आने वाले भय के कारण को, वर्तमान भय के कारण को तथा भविष्य काल में होने वाले भय के कारण को देखता है और दूर करना जानता है. यह स्वर्ग, अंतरिक्ष एवं पृथ्वी पर निवास करने वाले सभी प्राणियों को मणि धारण के कारण देखता है. (१)
EN English Translation
O herb named Sadapushpa! This man sees and knows how to overcome the cause of fear coming from being the one who wears your gem, the cause of the present fear and the cause of fear in the future. It sees all beings living in heaven, space and earth due to gem wearing. (1)