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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 20 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 20 • मन्त्र 6

4.20.6

Mantra ID: 4.20.6

द॒र्शय॑ मा यातु॒धाना॑न्द॒र्शय॑ यातुधा॒न्यः॑ । पि॑शा॒चान्त्सर्वा॑न्दर्श॒येति॒ त्वा र॑भ ओषधे ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.20.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सदापुष्पा जड़ी! मुझे राक्षसों एवं राक्षसियों के दर्शन कराओ. वे गूढ़ रूप से मुझे बाधा न पहुंचा सकें. मैं तुम्हें इसीलिए धारण करता हूं कि तुम मुझे सभी पिशाचों को दिखाओ. (६)

EN English Translation

O Sadapushpa Jadi! Make me see demons and demons. They can't esoterically obstruct me. I hold you so that you show me to all vampires. (6)

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