Popular:
अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 37 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 37 • मन्त्र 10

4.37.10

Mantra ID: 4.37.10

अ॑वका॒दान॑भिशो॒चान॒प्सु ज्यो॑तय माम॒कान् । पि॑शा॒चान्त्सर्वा॑नोषधे॒ प्र मृ॑णीहि॒ सह॑स्व च ॥ (१०)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 4.37.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अजशुंगी जड़ी! शैवाल खाने वाले, सभी को शोक पहुंचाने वाले उन गंधर्वो को जलों में प्रकाशित करो, जो युद्ध से संबंधित हैं. तुम सभी पिशाचों को मारो तथा पराजित करो. (१०)

EN English Translation

O ajshugi jadi! Publish in the waters the Gandharvas who eat algae, mourn all, who are related to war. You kill and defeat all the vampires. (10)

卐 HinduText AI