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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 102 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 102 • मन्त्र 3

6.102.3

Mantra ID: 6.102.3

आञ्ज॑नस्य म॒दुघ॑स्य॒ कुष्ठ॑स्य॒ नल॑दस्य च । तु॒रो भग॑स्य॒ हस्ता॑भ्यामनु॒रोध॑न॒मुद्भ॑रे ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.102.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे नारी! मैं सौभाग्यकारी देव के शीघ्रता करते हुए हाथों के द्वारा त्रिककुद पर्वत पर उत्पन्न नीलांजन, मधूक वृक्ष की लकड़ी, कूठ नामक वनस्पति और खस को पीस कर बनाए गए उबटन से तेरे शरीर पर लेप करता हूं. (३)

EN English Translation

O woman! I quickly apply nilanjan, honeywood, wood of the madhuk tree, vegetation called kuth and ubtan made by grinding khus on mount Trikkud with the hands of the fortunate God. (3)

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