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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 138 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 138 • मन्त्र 2

6.138.2

Mantra ID: 6.138.2

क्ली॒बं कृ॑ध्योप॒शिन॒मथो॑ कुरी॒रिणं॑ कृधि । अथा॒स्येन्द्रो॒ ग्राव॑भ्यामु॒भे भि॑नत्त्वा॒ण्ड्यौ ॥ (२)

ॐ

शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 6.138.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

॥ वैदिक संदर्भ ॥

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कामिनी! मेरे विषय में तेरा हृदय संतप्त हो. तेरा मुख भी सूख जाए इस के अतिरिक्त तू मेरे प्रति अभिलाषा करती हुई अत्यधिक संतप्त हो. तू सूखे मुंह वाली बन कर मेरे समीप आ. (२)

EN English Translation

O Kamini! Your heart is angry about me. In addition to your mouth drying up, you are very angry with me. Come near to me as a dry mouth. (2)

शास्त्र जिज्ञासा
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