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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 140 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 140 • मन्त्र 3

6.140.3

Mantra ID: 6.140.3

उप॑हूतौ स॒युजौ॑ स्यो॒नौ दन्तौ॑ सुम॒ङ्गलौ॑ । अ॒न्यत्र॑ वां घो॒रं त॒न्वः परै॑तु दन्तौ॒ मा हिं॑सिष्टं पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च ॥ (३)

ॐ

शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 6.140.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

॥ वैदिक संदर्भ ॥

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

दोनों ऊपर वाले दांत देव के द्वारा अनुमति प्राप्त, मित्र बने हुए, सुखकारक एवं शोभन हों. हे दोनों दांतो! नरमादा का संकेत करने वाला चिह्न बनाओ. वह चिल्ल पुत्र, पौत्र आदि के रूप में समृद्धि करने वाला हो. (३)

EN English Translation

Both the upper teeth should be allowed by God, friendly, pleasant and beautiful. Oh my two teeth! Make an icon indicating Narmada. He should prosper in the form of chilla son, grandson etc. (3)

शास्त्र जिज्ञासा
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