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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 18 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 18 • मन्त्र 3

6.18.3

Mantra ID: 6.18.3

अ॒दो यत्ते॑ हृ॒दि श्रि॒तं म॑न॒स्कं प॑तयिष्णु॒कम् । तत॑स्त ई॒र्ष्यां मु॑ञ्चामि॒ निरू॒ष्माणं॒ दृते॑रिव ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.18.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ईर्ष्याग्रस्त पुरुष! लोहार जिस प्रकार भस्त्रा अर्थात्‌ धौंकनी से सांस बाहर निकालता है, वैसे ही मैं तेरे हृदय से ईर्ष्या दूर करता हूं. (३)

EN English Translation

O jealous man! Just as a blacksmith breathes out of the bhastra i.e. bellows, I remove jealousy from your heart. (3)

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