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6.36.3
अ॒ग्निः परे॑षु॒ धाम॑सु॒ कामो॑ भू॒तस्य॒ भव्य॑स्य । स॒म्राडेको॒ वि रा॑जति ॥ (३)
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अथर्ववेद मन्त्र 6.36.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
उत्तम स्थानों में अग्नि सम्राट्, भूत और भविष्यत काल में कामनापूर्ण करने वाला हो कर विराजता है. (३)
EN English Translation
In the best places, the agni emperor sits in the past and the future as a wisher. (3)