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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 42 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 42 • मन्त्र 1

6.42.1

Mantra ID: 6.42.1

अव॒ ज्यामि॑व॒ धन्व॑नो म॒न्युं त॑नोमि ते हृ॒दः । यथा॒ संम॑नसौ भू॒त्वा सखा॑याविव॒ सचा॑वहै ॥ (१)

ॐ

शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 6.42.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

॥ वैदिक संदर्भ ॥

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पुरुष! धनुर्धारी जिस प्रकार धनुष पर चढ़ी हुई डोरी को उतारता है, उसी प्रकार मैं तेरे हृदय से क्रोध को दूर करता हूं. (१)

EN English Translation

O man! Just as the archer takes off the string mounted on the bow, so I remove anger from your heart. (1)

शास्त्र जिज्ञासा
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