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6.93.1
य॒मो मृ॒त्युर॑घमा॒रो नि॑रृ॒थो ब॒भ्रुः श॒र्वोऽस्ता॒ नील॑शिखण्डः । दे॑वज॒नाः सेन॑योत्तस्थि॒वांस॒स्ते अ॒स्माकं॒ परि॑ वृञ्जन्तु वी॒रान् ॥ (१)
शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 6.93.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद
पापियों की हिंसा के लिए यम, मृत्यु, अघमार, निर्त्रति, बश्चु, शर्व एवं नीलशिखंड आदि देवगण, अपने परिवार जनों के साथ अपनेअपने स्थान से चल दिए हैं. वे हमारे पुत्र, पौत्र आदि को छोड़ दें. (१)
EN अंग्रेज़ी अनुवाद
For the violence of sinners, devas like Yama, Death, Aghamar, Nirtriti, Bashchu, Sharva and Neelshikhand etc. have left their place with their family members. They should leave our sons, grandsons etc. (1)