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6.97.2
स्व॒धास्तु॑ मित्रावरुणा विपश्चिता प्र॒जाव॑त्क्ष॒त्रं मधु॑ने॒ह पि॑न्वतम् । बाधे॑थां दू॒रं निरृ॑तिं परा॒चैः कृ॒तं चि॒देनः॒ प्र मु॑मुक्तम॒स्मत् ॥ (२)
शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 6.97.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद
हे मेधावी मित्र और वरुण! तुम्हारे लिए दिया गया वह हवि रूप अन्न तुम्हे तृप्ति दे. तुम इस राजा पर प्रजाओं से युक्त बल एवं मधुर रस सींचो. तुम पराजय करने वाली पाप देवी निर््ऋृति को हम से विमुख कर के दूर देश में ले जाओ. तुम हमारे शत्रुओं के द्वारा किया हुआ पाप हम से दूर ले जाओ. (२)
EN अंग्रेज़ी अनुवाद
O meritorious friend and Varun! May that havi form food given for you give you satisfaction. You sprinkle force and sweet juices on this king with people. You should take nirrriti, the sin goddess who defeated, away from us and take her to a distant land. Take away from us the sins committed by our enemies. (2)