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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 25 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 25 • मन्त्र 1

7.25.1

Mantra ID: 7.25.1

यन्न॒ इन्द्रो॒ अख॑न॒द्यद॒ग्निर्विश्वे॑ दे॒वा म॒रुतो॒ यत्स्व॒र्काः । तद॒स्मभ्यं॑ सवि॒ता स॒त्यध॑र्मा प्र॒जाप॑ति॒रनु॑मति॒र्नि य॑च्छात् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.25.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

परम ऐश्वर्य वाले इंद्र देव ने हमारे लिए जो फल दिया तथा अग्नि, विश्वे देव, मरुद्गण और स्वका नामक देवों ने हमारे लिए जो फल दिया. सब के प्रेरक सविता और यथार्थ नाम वाले प्रजापति ने जिस फल की अनुमति दी. वह फल हमें प्राप्त हो. (१)

EN English Translation

The fruits that Indra Dev, who was the most opulence, gave for us and the fruits that the gods named Agni, Vishwe Dev, Marudgan and Swaka gave us. Savita, the inspiration of all, and Prajapati, who had the name Yatharth, allowed the fruit. May we get that fruit. (1)

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