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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 27 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 27 • मन्त्र 4

7.27.4

Mantra ID: 7.27.4

इ॒दं विष्णु॒र्वि च॑क्रमे त्रे॒धा नि द॑धे प॒दा । समू॑ढमस्य पांसु॒रे ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.27.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सब के रक्षक और दूसरों के द्वारा पराजित न होने वाले विष्णु ने इस पृथ्वीलोक से आरंभ कर के प्राणियों को धारण करने वाले तीनों लोक धारण किए. (४)

EN English Translation

Vishnu, the protector of all and not defeated by others, started from this earth and took the three worlds that possessed beings. (4)

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