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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 39 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 39 • मन्त्र 5

7.39.5

Mantra ID: 7.39.5

यदि॒ वासि॑ तिरोज॒नं यदि॑ वा न॒द्यस्तिरः । इ॒यं ह॒ मह्यं॒ त्वामोष॑धिर्ब॒द्ध्वेव॒ न्यान॑यत् ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.39.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पति! यदि तुम मेरी दृष्टि से ओझल हो जाओगे अथवा मुझ से दूर नदी के पार चले जाओगे, तब भी यह शंखपुष्पी नामक जड़ी पति से प्रेम करने वाली मेरे समीप तुम्हें इस प्रकार लाएगी, जैसे किसी को बांध कर लाया जाता है. (५)

EN English Translation

O husband! Even if you disappear from my sight or go across the river away from me, this herb named Shankhpushpi will bring you to me as if someone is tied up. (5)

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