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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 49 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 49 • मन्त्र 2

7.49.2

Mantra ID: 7.49.2

कु॒हूर्दे॒वाना॑म॒मृत॑स्य॒ पत्नी॒ हव्या॑ नो अस्य ह॒विषो॑ जुषेत । शृ॑णोतु य॒ज्ञमु॑श॒ती नो॑ अ॒द्य रा॒यस्पोषं॑ चिकि॒तुषी॑ दधातु ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.49.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवों के मध्य कुहू अर्थात्‌ अमावस्या रूप देवी अमृत अथवा जल की पत्नी अर्थात्‌ पालन करने वाली है. हव्य देने योग्य यह हमारे द्वारा दिए जाते हुए हवि को प्राप्त करे तथा हमारे यज्ञ की कामना करती हुई आज हमारा आह्वान सुने. इस के पश्चात हमारे यज्ञ को जानने वाली वह हमारे धन को पुष्ट करे. (२)

EN English Translation

Among the devas, Kuhu i.e. Amavasya form is the wife of Goddess Amrit or Water i.e. the follower. May it be able to give havya, get the havi given by us and listen to our call today wishing for our yajna. After this, he who knows our yajna should strengthen our wealth. (2)

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