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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 118 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 118 • ऋचा / मन्त्र 1

1.118.1

Mantra ID: 1.118.1

आ वां॒ रथो॑ अश्विना श्ये॒नप॑त्वा सुमृळी॒कः स्ववा॑ँ यात्व॒र्वाङ् । यो मर्त्य॑स्य॒ मन॑सो॒ जवी॑यान्त्रिवन्धु॒रो वृ॑षणा॒ वात॑रंहाः ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.118.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्चिनीकुमारो! तुम्हारा घोड़ों से चलने वाला सुखयुक्त एवं धनयुक्त रथ हमारे सामने आए. हे कामवर्षको! वह मानव मन के समान वेगवानू त्रिर्बधुर एवं वायु के समान तीव्रगामी है. (१)

EN English Translation

O aschinikumaro! Your happy and rich horse-driven chariot came before us. O work years! It is as fast as the human mind and as fast as the wind. (1)

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