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1.141.13
अस्ता॑व्य॒ग्निः शिमी॑वद्भिर॒र्कैः साम्रा॑ज्याय प्रत॒रं दधा॑नः । अ॒मी च॒ ये म॒घवा॑नो व॒यं च॒ मिहं॒ न सूरो॒ अति॒ निष्ट॑तन्युः ॥ (१३)
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ऋग्वेद मन्त्र 1.141.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अत्यंत प्रकाश धारण करने वाले अग्नि की हमने हव्यप्रदान आदि करमो एवं अर्चनासाधक मंत्रों द्वारा स्तुति की है. जिस प्रकार सूर्य बरसने वाले बादल को शब्द युक्त करता है, उसी प्रकार हम सब यजमान इस अग्ने की स्तुति करते हैं. (१३)
EN English Translation
We have praised the fire that holds the utmost light through the mantras of havyapradan adi karmo and archanasadhak mantras. Just as the sun makes the raining cloud with words, so all of us hosts praise this agne. (13)